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Tuesday, February 12, 2019

अहमद फ़राज़ साहब की ग़ज़ल

अभी कुछ और करिश्मे ग़ज़ल के देखते हैं
‘फ़राज़’ अब ज़रा लहजा बदल के देखते हैं


किस को बिकना था मगर ख़ुश हैं कि इस हीले से
हो गईं अपने ख़रीदार से बातें क्या क्या


अभी तो जाग रहे हैं चराग़ राहों के
अभी है दूर सहर थोड़ी दूर साथ चलो


किसे ख़बर वो मोहब्बत थी या रक़ाबत थी
बहुत से लोग तुझे देख कर हमारे हुए


अगर तुम्हारी अना ही का है सवाल तो फिर
चलो मैं हाथ बढ़ाता हूँ दोस्ती के लिए


Monday, February 11, 2019

*मैं और मेरा दोस्त*

बात यही कोई 2005 के आस-पास की ही होगी क्या दिन थे वो यार... उम्र भी लगभग 10-11 साल ही रही होगी जब तुम्हारी वो पतले टायर वाली आधी लाल और लगभग पूरी काली सी साइकिल उठा कर हम हर शाम में निकल पड़ते थे ना किसी तरह की नौकरी की टेंशन न ही सैलरी की ज़रूरत और ना ही किसी गर्लफ्रैंड वर्लफ्रेंड का चक्कर हम खुद में ही मस्त रहते थे।और तुम्हारी बेईमानी भी याद है जो तुम कहते थे कि आज तू चला ले साईकिल कल मैं चला दूंगा और वो कल कभी नही आया।और सबसे अच्छा तो उस सफर का नाम होता था 'अनजानी राहों पर'...
और जब अंधेरा होते ही हम लौटते थे अपनी उस 'अनजानी राहों से' तो तेरी अम्मी की छड़ी भी याद है जो तू अगले दिन क्लास में तब बताता था जब टीचर पढ़ा रहें हो और अपने साथ मुझे भी मार खिलवाता था....और तेरे झूठे बहानो का तो कहना ही क्या उनमे भी तू मुझे अपना 'सह-अपराधी' बनाता था... क्या दिन थे वो यार।।।

Sunday, February 10, 2019

सफ़र

मैं सफर हुं सावन का
गाड़ी में से हाथ निकालो और
भिगो लो अपने हाथों को बरसती हुई छोटी-छोटी बूँदों से....
मैं सेमल का पेड़ हुं
मुझे जोर से झकजोरो और
गिरती टूटती पत्तियों को बंद कर लो अपने हाथों
में...
मैं बिखरी हुई याद हुं
मुझे समेटो और
बना लो एक तस्वीर और छुपा लो हमेशा के लिये
अपने दिल में....

Thursday, February 7, 2019

फ़िल्म समीक्षा-Adil's cut

2.5/5

स्टारर-- शाहरुख खान, अनुष्का शर्मा, कटरीना कैफ,जीशान अय्यूब,सीबा चड्ढा

अपने समय से पूर्व का सिनेमा

ज़ीरो में हर वो चीज है जो 1 बड़े स्टार फ़िल्म में होना चाहिए अगर बात करें स्टोरी की तो वो ज्यादातर शाहरुख के आसपास ही घूमती है शाहरुख ने फ़िल्म में बौने का किरदार निभा कर जो साहस दिखाया वो लाज़वाब है जो किसी बड़े स्टार ने नही किया और यकीन मानिये गज़ब काम किया है।अपने हिस्से के अनुष्का और कटरीना ने अच्छा काम किया है कटरीना ने खासतौर पर अपने काम से चौकाया है।स्पेशल इफ़ेक्ट अच्छे है।अगर कहीं फ़िल्म चूकती है तो फ़िल्म के निर्देशन ने तथा फ़िल्म की लिखाई में हिमांशु शर्मा और आनंद एल रॉय थोड़ा निरास करते हैं।फ़िल्म का टॉपिक अच्छा था।अंत मे इतना कह सकते है कि ये फ़िल्म उस समय पर आई है जहाँ के शायद दर्शक तैयार नही थे।
अगर आप शाहरुख को पसन्द करते है तो फ़िल्म को 1 बार देखने मे कोई बुराई नही है।

Wednesday, February 6, 2019

3 खूबसूरत शेर

1.जब भूख आती है ना साहब
   और मुझे छोड़ कर मेरी फूल सी
   मासूम बच्ची के चेहरे पर रूदन
  और आँखों मे आंसू लाती है तो
  मैं स्याह रात में तंग गलियों
  से निकलती हूं और अपना जिस्म
  बेच देती हूं
  हाँ साहब मै भूख के बदले जिस्म बेच देती हुं।
        .............................................
2.आज़ादी किसे कहतें हैं?
   बच्चे इस उम्मीद में बड़े हो जातें हैं कि वयस्को की            ज़िंदगी बहुत बेहतरीन और उद्देश्यों की पूर्ति के लिए होती है।
लेकिन जब वो बड़े होते हैं और उन्हें पता चलता है कि ये सब बातें कोरी बकवास हैं तब इसी बिगड़ी हुई ज़िन्दगी को जश्न के साथ जीना ही सच्ची आज़ादी है।
        ...........….................................
3.कि तुम मुझे अच्छे लगते हो...
   मैंने तो कहा तुम मुझे मेरे लगते हो....
   मैंने कब कहा कि मैं इश्क़ लिखता हुँ...
   मैंने तो कहा मैं तुम्हे लिखता हुँ..
   मैंने कब कहा कि मुझे मरहम चाहिए...
   मैने तो कहा मुझे तुम्हारी छुअन चाहिए...

Tuesday, February 5, 2019

Tum kyu nazar a jaty ho

Tum kyu nazar aa jaty ho..
Ab jbki sabkuch badal chuka h tb kyu nazar aa jaty ho
Sb badal gya h wo aag jo seeny me dahakti t hi ab unper wqt ne pani fer diya h.
Ab wha kevel dhua hai
Aankho me lgta dhua
Pehly jha tumhara chehra dekhny pr wo gulabi ho jata tha ab peela pad jata h...
Nahi badli to srf tumhari hasi...
Tmhare maathe ka til,Tmhare baen pair ka kala dhaga
Aur tmhare khat ke waady ye ab b waisy h ye nhi badlenge inhe shyd badalna bhi ni chaiye

Monday, February 4, 2019

इंतेज़ार (एक कविता) Medium

आओ चलो इंतेज़ार करें
आँधियों के रुकने का
बारिशों के थमने का
अंधेरी रात के सुबह में बदलने का
चलो इंतेज़ार करें...
आओ हम यहीं रुक जाएं यहीं हां यहीं उस बड़े पेड़ के पीछे चलो छुप जाएं
जबतक की पानी की बूंदें टूट ना जाएं....
आओ वक़्त की तसवीर बदलने का इंतेज़ार करें
तबतक जबतक की उम्मीदें जिंदा है तबतक....
रगों में खून जबतक रवां है तबतक
इंतेज़ार करें...
कोशिशें जबतक हिम्मत बन कर दिल मे जबतक ज़िंदा है तबतक....
नज़रों के धूमिल हो जाने तक
दर्द के चेहरे पर पसर जाने तक...चलो इंतेज़ार करें
आओ इस भीड़ में कहीं खो जाएं
आओ चलो सो जाएं...जबतक की मौसम बदल न जाए
चलो निकल पड़े उस दूर पहाड़ी के बगल से गयी घुमावदार काली सड़क कहीं दूर चले जाने के लिए...
आओ चलो इंतेज़ार करें
वक़्त के करवट बदलने का
नई सी उजली सुबह के आने का चलो इंतेज़ार करें.....

माँ

मेरी माँ पढ़ी नही है लेकिन
जब भी मैं पढ़ने के लिए प्रदेश जाता हुँ तो
वो मुझे गाँव के उस पुराने टीले तक छोड़ने आती है और अपनी आंसुओ की स्याही से बहुत कुछ लिख जाती है...
लेकिन मेरी माँ पढ़ी नही है...

एक युद्ध त्रासदी....

वो लोग अपने घरों से तब निकाले गए
जब उन्हें एक छत की सख़्त जरूरत थी।
उनके हाथ से रोटी तब छीनी गयी
जब वो सख़्त भूख  में असहाय पड़े थे।
उनके हांथों से उनके बच्चे तब छीने गए
जब वो उनसे गंभीर मोह में बंध चुके थे।
उनके ज़ख्मो को तब छेड़ा गया
जब वो नासूर बन चुके थे।
तुम्हें नही पता कि
उनके साथ क्या-क्या हुआ तब जबकि वो उसके लिए बिल्कुल तैयार नही थे।

Polar vertex क्या है?

ध्रुवीय भंवर या पोलर भंवर या पोलर वोर्टेक्स क्या है ? ध्रुवीय भंवर या पोलर भंवर या पोलर वोर्टेक्स पर चर्चा करने से पहले, यह जान लें कि-  भं...